5 वक़्त की नमाज़ हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है और इसका एक मुक़र्रर वक़्त होता है।
हर नमाज़ अपने वक़्त पर अदा करना ज़रूरी है, क्योंकि अल्लाह तआला ने हर नमाज़
के लिए ख़ास औक़ात मुक़र्रर किए हैं। इसमें फ़जर, ज़ोहर, अस्र, मग़रिब और ईशा
शामिल हैं। हर वक़्त की नमाज़ का अपना एक फ़ज़ीलत और बरकत है जो मुसलमान की
रूहानी ज़िंदगी को मज़बूत करती है। इस ब्लॉग में हम 5 वक़्त की नमाज़ों के
औक़ात का टाइम टेबल और उनकी अहमियत का ज़िक्र करेंगे, जो आपकी इबादत में मददगार
साबित हो सकती है।
अगर आपको पांचों नमाज़ का वक्त जानना है तो आज के दौर में बहुत आसान है, आप
चाहे तो goggle से पता कर सकते है । और बहुत सी अशी app है जिससे आप पता कर
सकते हो जैसे की islam 360 है।
5 Waqt Ki Namaz Ka Time Table : 5 वक्त की नमाज़ का टाइम टेबल
Fajr Ki Namaz Ka Waqt: फ़जर की नमाज़ का वक्त :
फजर की नमाज़ का वक़्त सुबह फजर के वक़्त शुरू होता है और सूरज निकलने तक रहता
है। ये वक़्त सुबह की रोशनी और सुकूनियत का होता है, जो दिन की शुरुआत अल्लाह
की इबादत और रहमत के साथ करने का बेहतरीन मौका देता है। नमाज़ बराबर अदा करनी
चाहिए।
फजर की नमाज़ की अहमियत बहुत ज़्यादा है, क्योंकि ये दिन की इबादत का आग़ाज़
होती है। इस वक़्त अल्लाह की रहमत और बरकत का नुज़ूल होता है, और रूहानी
सुकून हासिल होता है।
Zohar Ki Namaz Ka Waqt: जुहार की नमाज़ का वक्त :
जुहर की नमाज़ का वक़्त सूरज ढलने के बाद शुरू होता है और अस्र तक रहता है। ये
वक़्त दिन के दरमियान का होता है, जब मुसलमान अपनी मस्रूफ़ियत से वक़्त निकालकर
अल्लाह की इबादत करते हैं। नमाज़ को वक़्त पर अदा करना रूहानी सुकून और बरकत का
ज़रिया है।
ज़ोहर की नमाज़ की अहमियत इस लिए ज़्यादा है क्योंकि ये दिन के दरमियान
अल्लाह की इबादत का ज़रिया है। इस वक़्त मुसलमान अपने दिन की मस्रूफ़ियत से
ब्रेक लेकर अल्लाह की रहमत और बरकत तलाश करते हैं।
Asar Ki Namaz Ka Waqt: असर की नमाज़ की वक्त :
असर की नमाज़ का वक़्त सूरज ढलने के बाद शुरू होता है और मग़रिब तक रहता है। ये
वक़्त दिन के आखिरी हिस्सों का होता है, जो अल्लाह की रहमत और माफी तलब करने का
मौका देता है। वक़्त पर नमाज़ अदा करना इमां की मज़बूती का सबूत है।
असर की नमाज़ की अहमियत बहुत ज़्यादा है, क्योंकि ये दिन के आख़िरी हिस्सों
में अदा होती है। ये वक़्त अल्लाह की रहमत और माफी तलब करने का होता है। इस
नमाज़ को बराबर अदा करने से रूहानी सुकून और बरकत मिलती है।
Maghrib Ki Namaz Ki Ahmiyat: मगरीब की नमाज़ की अहमियत
मग़रिब की नमाज़ का वक़्त सूरज घ़ूरूब होते ही शुरू होता है और इशा तक रहता
है। ये वक़्त एक ऐसे लम्हे का होता है जब दिन का काम मुक़म्मल हो जाता है और
रात की शांति में अल्लाह की इबादत का मौका मिलता है। नमाज़ बराबर अदा करनी
चाहिए।
मग़रिब की नमाज़ की अहमियत इस लिए ज़्यादा है क्योंकि ये दिन के ख़त्म होने
पर अदा होती है। ये वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करने का होता है, और रूहानी
सुकून और बरकत का ज़रिया बनता है।
Isha Ki Namaz Ka Waqt:
ईशा की नमाज़ का वक्त :
ईशा की नमाज़ का वक़्त रात के आख़िरी हिस्से तक रहता है। ये वक़्त रात की
गहराई में होता है, जब लोग अपनी थकान के बाद अल्लाह की इबादत करते हैं। इस
वक़्त की नमाज़ बराबर अदा करना इमान को मज़बूती और रूहानी सुकून देता है।
मग़रिब की नमाज़ की अहमियत बहुत ज़्यादा है क्योंकि ये दिन के ख़त्म होते ही
अल्लाह की रहमत और शुक्र अदा करने का मौका देती है। इस वक़्त की नमाज़ रूहानी
सुकून का ज़रिया है, और इससे मुसलमान अपनी इबादत को मुकम्मल करते हैं।
Conclusion : आखिरी बात
5 वक्त की नमाज़ हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है और हर नमाज़ का अपना एक मुक़र्रर
वक्त है। नमाज़ों को उनके वक्त पर अदा करना रूहानी सुकून और अल्लाह की रहमत का
ज़रिया है। फ़जर, ज़ोहर, असर, मग़रिब और ईशा, हर एक नमाज़ अपनी अहमियत और बरकत
रखती है। इन नमाज़ों को वक्त पर अदा करके हम अपने इमान को मज़बूत करते हैं और
अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारने की कोशिश करते हैं। हर
नमाज़ एक नई रौशनी और सुकून का ज़रिया है, जो मुसलमान की रूहानी ज़िंदगी को
बेहतर बनाता है।
5 Waqt Ki Namazon Ka Time Table Ke Bare Mein Sawalat : 5 वक़्त की नमाजों
का टाइम टेबल के बारे में सवालात
1. फज्र की नमाज का वक्त कब होता है? फज्र की नमाज सुबह से पहले, यानी सुबह सादिक के बाद शुरू होती है और सूरज
निकलने से पहले खत्म होती है। ये वक़्त रात के ख़त्म होने और नई सुबह की इबादत के
लिए होता है।
2. ज़ुहर की नमाज़ का वक़्त कैसे मालूम करें? ज़ुहर की नमाज़ का वक़्त सूरज के बिल्कुल ऊपर से ढलने के बाद शुरू होता है और
असर के वक़्त के आने तक रहता है। ये दिन का दरमियानी हिसा होता है, जब रोज़ाना की
इबादत की ज़रूरत होती है।
3. असर की नमाज का वक्त कब शुरू होता है? असर की नमाज का वक्त तब शुरू होता है जब एक साया असली चीज के साये के बराबर या
ज्यादा हो जाए और मगरिब के वक्त के आने तक रहता है। ये दिन के ख़त्म होने से पहले
होती है।
4. मगरिब की नमाज का वक्त कैसे मालूम करें?
मगरिब की नमाज़ का वक़्त सूरज ग़ुरूब होने के बाद शुरू होता है। ये वक़्त चाँद के
उठने से पहले ख़तम होता है। मगरिब का वक़्त दिन और रात के दरमियान का होता है।
5. ईशा की नमाज का वक्त कब होता है? ईशा की नमाज का वक्त पूरी रात के लिए होता है, यानी जब पूरी तारीख छा जाए और
फज्र के वक्त से पहले तक रहता है। लेकिन बेहतरीन है के ये नमाज जल्दी पढ़ी जाएगी।
6. क्या नमाज़ के वक़्त जगह के मुताबिक़ बदलते हैं? हां, नमाजों के वक्त हर जगह के सूरज के निकलने और ढलने के मुताबिक़ बदलते हैं।
हर मुल्क और शहर का टाइम जोन अलग होता है, इसलिए वक्त का ख्याल रखें।
7. क्या वक्त की पाबन्दी जरूरी है? हां, वक्त की पाबंदी नमाजों का एक अहम हिस्सा है। हर नमाज को उसके वक्त पर अदा
करना इबादत की मकबूलियत के लिए जरूरी है। देर करना गुनाह है.
8. क्या नमाज का वक्त मालूम करने के ऐप्स हैं? हां, आज कल नमाज के वक्त मालूम करने के लिए कई मोबाइल ऐप्स उपलब्ध हैं, जैसे
मुस्लिम प्रो, सलातुक, और इस्लामिकफाइंडर। ये ऐप्स वक्त के साथ अजान का
नोटिफिकेशन भी देती हैं।
9. अगर वक्त मालूम ना हो तो नमाज कैसे पढ़ें? अगर वक्त मालूम ना हो, तो सूरज के उठें, ढलने और ग़ुरूब होने के आसार देख कर
नमाज़ के वक़्त का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। अपने क्षेत्र के उलेमा मशवरा करें।
10. क्या वक़्त पर नमाज़ पढ़ने से गुनाह मिलता है? हां, वक्त पर नमाज पढ़ना और बिना किसी वैध वजह के छोड़ना गुनाह है। नमाज़ वक़्त
पर अदा करना एक मुस्लिम का फ़र्ज़ है और अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है।
Surah Yaseen | सूरह यासीन शरीफ़ तर्जुमा, फ़ज़ीलत और फ़ायदे
सूरह यासीन क़ुरआन पाक की एक बहुत ही अहम सूरह है। ये सूरह 36 नंबर पर है और इसे क़ुरआन का दिल भी कहा जाता है। सूरह यासीन को रोज़ाना पढ़ने से इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में फ़ायदा होता है। इस सूरह में अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत, रिसालत का पैग़ाम और क़यामत के दिन का ज़िक्र किया है। बहुत से लोग इसे हर सुबह या रात में पढ़ते हैं ताकि उनकी मुश्किलें दूर हो जाएं। यहाँ पर सूरह यासीन को हिंदी में तर्जुमा के साथ दिया गया है, साथ ही इसके पढ़ने के फ़ायदे भी बताए गए हैं।
इस आर्टिकल में हम सूरह यासीन को हिंदी में तफ़सील से बयान कर रहे हैं जिसमें हर आयत का हिंदी तर्जुमा भी दिया गया है। साथ ही, इस सूरह के पढ़ने के फ़ायदे और इसकी फ़ज़ीलत को भी आसान ज़बान में समझाया गया है।
Surah Yaseen Shareef Arabic Mein aur Hindi Tarjuma Ke Saath.
يٰسٓ (1)
यासीन
यासीन
وَالْقُرْآنِ الْحَكِيمِ (2)
वल कुर आनिल हकीम
कसम है हिकमतवाले कुरआन की।
إِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ (3)
इन्नका लमिनल मुरसलीन
की तुम यकीनन रसूलों में से हो।
عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ (4)
अला सिरातिम मुस्तकीम
सीधे रास्ते पर हो।
تَنزِيلَ الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ (5)
तनजीलल अजीज़िर रहीम
(और ये कुरआन ) गालिब और रहम करनेवाली हस्ती का उतारा हुआ है।
इन्ना नहनु नुहयिल मौता वनकतुबु मा क़द्दमु व आसारहुम वकुल्ला शयइन अहसैनाहु फी इमामिम मुबीन
हम एकीनंन एक दिन मुरदों को जिन्दा करने वाले हैं। जो कुछ काम उनोहने , किए है वो सब हम लिखते जा रहे है , और जो कुछ नीसान उनोहने पीछे चोर है, वो भी हम लिख रहे है। (9) हर चीज को हमने एक खुली किताब में लिख रखा है।
जब हमने उनके( पास सुरू में ) दो रसूल भेजे तो उन्होंने दोनों को झुकला दिया , फिर हमने यक तीसरे के जरिए उनकी ताइद की और उन सब ने कहा येकिन जनों हमे तुम्हारे पास रसूल बनाके भेजा गया है।
कालू मा अन्तुम इल्ला बशरुम मिसळूना वमा अनजलर रहमानु मिन शय इन इन अन्तुम इल्ला तकज़िबुन
उन्होंने कहा तुम्हारी हकीकत इसके सिवा कुछ भी नहीँ की तुम हम जैसे ही आदमी हो। और खुदा -ये-रहमान ने कोई चीज नाजिल नहीँ की है , और तुम सरासर झुट बोल रहे हो।
बस्ती वालों ने कहा हमने तो तुम्हारे अंदर नहूसत महसूस की है। एकिन जनों अगर तुम बाजं ना आए तो हम तुम पर पत्थर बरशाएंगे और हमरे हाथों तुम्ह बढ़ी दर्दनाक सजा मीलिगी।
कालू ताइरुकुम म अकुम अइन ज़ुक्किरतुम बल अन्तुम क़ौमूम मुस रिफून
रसूलों ने कहा – तुम्हारी नहूसत खुद तुम्हे साथ लगी हुई है। (7) क्या ये बाते इसलिए कर रहे हो की तुम्हें नसीहत की बात पहुंचाई गई है ? असल बात यह है की तुम खुद हद से गुजरे हुए लोग हो।
व जा अमिन अक्सल मदीनति रजुलुय यसआ काला या कौमित त्तबिउल मुरसलीन
रसूलों ने कहा- तुम्हारी नहूसत ख़ुद तुम्हारे साथ लगी हुई है। (7) क्या ये बातें इसलिये कर रहे हो कि तुम्हें नसीहत की बात पहुँचाई गई है? असल बात यह है कि तुम ख़ुद हद से गुज़रे हुए लोग हो।
भला क्या उसे छोड़कर मैं ऐसों को माबूद मानूँ कि अगर ख़ुदा-ए-रहमान मुझे कोई नुक़सान पहुँचाने का इरादा कर ले तो उनकी सिफ़ारिश मेरे किसी काम न आये, और न वे मुझे छुड़ा सकें?
اِنِّیْۤ اِذًا لَّفِیْ ضَلٰلٍ مُّبِیْنٍ (24)
इन्नी इज़ल लफी ज़लालिम मुबीन
अगर मैं ऐसा करूँगा तो यक़ीनन मैं खुली गुमराही में मुब्तला हो जाऊँगा।
اِنِّیْۤ اٰمَنْتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُوْنِ (25)
इन्नी आमन्तु बिरब्बीकुम फसमऊन
मैं तो तुम्हारे परवर्दिगार पर ईमान ला चुका। अब तुम भी मेरी बात सुन लो।
(आख़िरकार बस्ती वालों ने उसको क़त्ल कर दिया, (9) और अल्लाह तआला की तरफ़ से उससे) कहा गया कि जन्नत में दाख़िल हो जाओ। (10) उसने (जन्नत की नेमतें देखकर) कहा- काश! मेरी क़ौम को मालूम हो जाये।
सुब्हानल लज़ी ख़लक़ल अज़वाज कुल्लहा मिम मा तुमबितुल अरज़ू वमिन अनफुसिहिम वमिम मा ला यअलमून
पाक है वह ज़ात जिसने हर चीज़ के जोड़े-जोड़े पैदा किये हैं, उस पैदावार के भी जो ज़मीन उगाती है, और ख़ुद उन इनसानों के भी और उन चीज़ों के भी जिन्हें ये लोग (अभी) जानते तक नहीं हैं। (13)
और सूरज अपने ठिकाने की तरफ़ चला जा रहा है। यह सब उस ज़ात का मुक़र्रर किया निज़ाम (सिस्टम) है जिसका इक्तिदार (ताक़त और इख़्तियार) भी कामिल है, जिसका इल्म भी कामिल है।
और चाँद है कि हमने उसकी मन्ज़िलें नाप-तौलकर मुक़र्रर कर दी हैं, यहाँ तक कि वह जब (उन मन्ज़िलों के दौरे से) लौटकर आता है तो खजूर की पुरानी टहनी की तरह (पतला) होकर रह जाता है। (15)
व इजा कीला लहुमुत तकू मा बैना ऐदीकुम वमा खल्फकुम लअल्लाकुम तुरहामून
और जब उनसे कहा जाता है कि बचो उस (अज़ाब) से जो तुम्हारे सामने है, और जो तुम्हारे (मरने के) बाद आयेगा, ताकि तुम पर रहम किया जाये। (तो वह ज़रा कान नहीं धरते)
और जब इनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने तुम्हें जो रिज़्क़ दिया है उसमें से (ग़रीबों पर भी) ख़र्च करो, तो ये काफ़िर लोग मुसलमानों से कहते हैं कि क्या हम उन लोगों को खाना खिलायें जिन्हें अगर अल्लाह चाहता तो ख़ुद खिला देता? (मुसलमानो!) तुम्हारी हक़ीक़त इसके सिवा कुछ भी नहीं कि तुम खुली गुमराही में पड़े हुए हो।
कालू या वय्लना मम ब असना मिम मरक़दिना हाज़ा मा व अदर रहमानु व सदकल मुरसलून
कहेंगे कि हाय हमारी कमबख़्ती ! हमें किसने हमारे मर्क़द (यानी क़ब्र) से उठा खड़ा किया है? (जवाब मिलेगा कि) यह वही चीज़ है जिसका ख़ुदा-ए-रहमान ने वायदा किया था, और पैग़म्बरों ने सच्ची बात कही थी।
और हमने (अपने) इन (पैग़म्बर) को न शायरी सिखाई है, और न वह उनकी शान के लायक़ है। (21) यह तो बस एक नसीहत की बात है, और ऐसा कुरआन जो हक़ीक़त को खोल-खोलकर बयान करता है
(हालाँकि) उनमें यह ताक़त ही नहीं है कि इनकी मदद कर सकें, बल्कि वे इनके लिये एक ऐसा (मुखालिफ़) लश्कर बनेंगे जिसे (क़ियामत में इनके सामने) हाज़िर कर लिया जायेगा। (23)
फला यह्ज़ुन्का क़व्लुहुम इन्ना नअ’लमु मा युसिर रूना वमा युअ’लिनून
ग़र्ज़ कि (ऐ पैग़म्बर!) इनकी बातें तुम्हें रंजीदा (परेशान और दुखी) न करें। यक़ीन जानो हमें सब मालूम है कि ये क्या कुछ छुपाते और क्या कुछ ज़ाहिर करते हैं।
भला जिस ज़ात ने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है, क्या वह इस बात पर क़ादिर नहीं है कि इन जैसों को (दोबारा) पैदा कर सके ? क्यों नहीं! जबकि वह सब कुछ पैदा करने की पूरी महारत रखता है।
अरबी, हिंदी तर्जुमा और तिलावत के साथ पढ़ें आसान शब्दों में समझें और बरकतें पाएं
Surah Yaseen Ki Fazilat: सुरह यासीन की फजीलत।
बहकी की रिवयत में आता है इस सूरत को अपने मरने वालों के पास पराह करो। मरने वालों के पास पढ़ने की इसलिए हिदाएत फरमाई की मरने वाले पर तमाम इस्लामी अकाएद ताजा हो जाए।
मुसनते दारमि से रिवाएत है ,नबी सल्लेलाहू वसल्लम ने फरमाया जिसने सुबह सूरह यासीन की तिलवात की उसके सारे काम पूरे हो जाएंगे। ( ये हादिश जाईफ है सनत के हिसाब से ) पर इस अमल को करने में कोई हर्ज नही है।
सूरह यासीन पढ़ने से रोजी में बरकत और नजात मिलती है।
सूरह यासीन को पढ़कर मरहूम के लिए दुआ कर सकते है उसकी मगफिरत के लिए , ये एक बेहतरीन अमल है।
सूरह यासीन की रोजाना तिलवत करने से इंसान की रूहानी और जिस्मानी बीमारिओं से सिफ़ा मिलती है।
सूरह यासीन को पढ़कर अपनी गुनाओं की माफी मांगने से अल्लाह की मगफिरत भी मिल सकती है।
सुरह यासीन की तिलावत करने से सैतान मरदूद से निजात मिलती है।
सुराह यासीन का रोजाना पढ़ने से बरकत , हिफाजत, ईलाही मदद रूहानी सुकून, गुनाहों की माफी, कयामत के दिन शीफात, हिफाजत और बढ़हाए जाने वाले अजर को लाता हैं।
Surah Yaseen Ke Bare Mein Aham Sawaalat: सूरह यासीन के बारे में अहम सवालात
1. सूरह यासीन का मतलब क्या है?
सूरह यासीन कुरान की एक सुरा है जिसका मतलब सिर्फ अल्लाह ताला जनता है।
2. सूरह यासीन क्यों खास है?
सुरा यासीन को कुरान का दिल भी कहते बहुत से हदीथ में मिलता है की सुरा यासीन पढ़ने की बहुत फजीलत है।
3. सूरह या-सिन के फ़ायदे क्या हैं?
सुरा यासीन पढ़ने से गुनाहों की माफी होती है और तौबा कुबूल होती है।
सुरा यासीन तिलावत से बीमार को शिफा मिलती है।
इसको पढ़ने से रोजगार और रिज्क में बरकत होती है।
4. सूरह यासीन क़ुरान में कैसी ढूंढी जाती है?
सुरह यासीन कुरान के 22 पारा मैं आता हैं और ये सुराह नंबर 36 है जो की कुरान के पेज के उप्पर लिखी हुई होती हैं वहा से देखके ढूंढ सकते हैं।
5. सूरह यासीन को सोने से पहले पढ़ने के क्या फायदे हैं?
सही हदीश के मुताबिक कोई फजीलत बयान नहीं की गई है लेकिन इसे पढ़ने से कोई हर्ज नहीं हैं,ये एक अच्छा अमल है।
6. कौन सी सूरह चेहरे पर ख़ूबसूरती देती है?
इस्लाम में कोई भी सुरा खास खूबसूरती के लियेन्ही पढ़ा जाता खूबसूरती के लिए नमाज वजू कुरान की तिलावत झूठ बुराई गीबत करने से बचे तलवा।
7. कौनसी सी सुरह पढ़ने से मन्नत पूरी होती हैं?
कुरान में ऐसे कोई जिक्र नहीं की कोई खास सुरा पढ़ने से मन्नत कुबूल होती है मुसलमान को चाहिए की नमाज और सुन्नत पे चले और अल्लाह ताला से कभी न उम्मीद न हो तकवा पर कायम रहे
गुनाह से बचे मन्नत अगर आपके हक में बेहतर है तो जरूर कुबूल होगी अगर नही हो रही है तो अल्लाह ताला आपको उससे बेहतर देगा।